बाबरी पर फैसले के बाद शांतिपूर्ण रही अयोध्या, प्रयाग और बनारस की कार्तिक पूर्णिमा

अयोध्या के रामजन्मभूमि-बाबरी मस्जिद विवाद पर आए सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद अयोध्या, प्रयागराज और वाराणसी में कार्तिक पूर्णिमा शांतिपूर्ण रही. हालांकि फैसले के बाद अयोध्या में बढ़ाई गई सुरक्षा और बंदिशों के चलते इस बार कार्तिक पूर्णिमा पर श्रद्धालुओं की संख्या बेहद कम रही. जहां आमतौर पर कार्तिक पूर्णिमा के मौके पर अयोध्या में 10 लाख से अधिक श्रद्धालु आते थे. वहीं, इस बार सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद रामनगरी में लगाई गई सुरक्षा और बंदिशों के कारण लोगों की भीड़ सिर्फ 20 फीसदी ही रही.

कार्तिक पूर्णिमा के दिन वाराणसी में देव दीपावली जोरदार तरीके से मनाई गई. वाराणसी के सभी 84 घाटों पर दिए जलाए गए. दशाश्वमेध और शीतला घाट पर गंगा आरती हुई. देव दीपावली देखने के लिए देश-विदेश के लाखों पर्यटक बनारस पहुंचे थे. मान्यता है कि देव दीपावली के मौके पर भगवान शंकर ने त्रिपुरासुर राक्षस का वध किया था जिसके बाद देवताओं ने काशी में ही 33 करोड़ देवी-देवताओं ने मिलकर दीपावली मनाई थी

जबकि, वहीं प्रयागराज में कार्तिक पूर्णिमा के मौके पर संगम पर श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ पड़ा. स्थानीय मीडिया के अनुसार प्रयागराज में इस मौके पर लाखों लोगों ने संगम में आस्था की डुबकी लगाई. साथ ही संगम तट पर पूजा-अर्चना भी की. वहीं, वाराणसी के घाटों पर लाखों लोगों ने कार्तिक पूर्णिमा पर गंगा नदी में स्नान किया. साथ ही देव दीपावली होने के कारण पंचगंगा घाट पर हजारों दीए जलाए गए. घाटों पर दीए जलाने की परंपरा 1983 में शुरू हुई थी. इसे पूर्व काशी नरेश स्वर्गीय डॉ. विभूति नारायण सिंह ने शुरू कराया था.

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